शिक्षकों के ज्ञान और संस्कारों से बनता है बेहतर समाजः कुलपति

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सशक्त उत्तराखंड,पंतनगर। गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर में शिक्षक दिवस के अवसर पर पोस्ट ग्रेजुएट सोसायटी की ओर से समारोह का आयोजन किया गया। प्रौद्योगिकी महाविद्यालय स्थित मल्टी पर्पज हॉल में आयोजित समारोह में विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं विश्वविद्यालय के कुलपति डा. एस.के. कश्यप द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्प अर्पण के साथ किया गया। अधिष्ठाता स्नातकोत्तर महाविद्यालय डा. लोकेश वार्ष्णेय ने सभी अतिथियों एवं शिक्षकों का स्वागत किया।

समारोह में विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर डा. आर.सी.एस. मेहता एवं डा. बी.एम. कुमार ने अपने अनुभव साझा किए तथा शिक्षक के रूप में अपने लंबे कार्यकाल की स्मृतियों को उपस्थित सदस्यों के साथ साझा किया। उन्होंने विश्वविद्यालय के विकास में शिक्षकों की भूमिका और गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व पर भी प्रकाश डाला।

इस अवसर पर कुलपति डा. एस.के. कश्यप ने सभी शिक्षकों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शिक्षक केवल विद्यार्थियों को विषय संबंधी ज्ञान प्रदान करने का कार्य नहीं करते, बल्कि उनके व्यक्तित्व, चरित्र और सोच के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के ज्ञान, अनुभव और संस्कारों से ही बेहतर समाज और सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है। कुलपति ने कहा कि एक शिक्षक विद्यार्थी को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित ज्ञान नहीं देता, बल्कि उसे जीवन की चुनौतियों का सामना करने, सही निर्णय लेने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने के लिए भी तैयार करता है। उन्होंने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों के लिए मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत होते हैं तथा उनका प्रभाव विद्यार्थी के पूरे जीवन पर रहता है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि विष्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी आगे चलकर समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सेवाएं देते हैं। ऐसे में शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नैतिक मूल्यों, सामाजिक संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना अत्यंत आवश्यक है।

कुलपति ने विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की वर्तमान उपलब्धियों के पीछे उनके वर्षों के समर्पण, मेहनत और अनुभव की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति केवल सेवा से निवृत्ति है, संस्थान से संबंध और अनुभवों का अंत नहीं। वरिष्ठ शिक्षकों का अनुभव आज भी विष्वविद्यालय के लिए मार्गदर्शक है और उनकी उपलब्धियां नई पीढ़ी के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को प्रेरणा देती हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक दिवस शिक्षकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को यह समझने का अवसर देते हैं कि किसी भी शिक्षण संस्थान की वास्तविक शक्ति उसके समर्पित शिक्षकों में निहित होती है।

समारोह के दौरान विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया गया। सम्मानित शिक्षकों ने भी विश्वविद्यालय से जुड़े अपने अनुभवों और स्मृतियों को साझा किया। उपस्थित विश्वविद्यालय परिवार ने उनके दीर्घकालीन योगदान के प्रति सम्मान एवं आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम के अंत में पोस्ट ग्रेजुएट सोसायटी के को-स्टाफ काउंसलर ने सभी अतिथियों, सम्मानित शिक्षकों, संकाय सदस्यों एवं उपस्थित सदस्यों का आभार व्यक्त किया। समारोह ने विश्वविद्यालय में गुरु-शिष्य परंपरा, शिक्षकों के प्रति सम्मान और उनके योगदान के प्रति कृतज्ञता की भावना को और मजबूत किया।

इस अवसर पर सभी महाविद्यालयों के अधिष्ठातागण, निदेशकगण, संकाय सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित थेे।


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