सशक्त उत्तराखंड,पंतनगर। गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर में दो-दिवसीय तीसरी राष्ट्रीय परामर्श कार्यशाला ‘बूस्टिंग रिसर्च, एकेडमिक्स, इनोवेशन एंड नेटवर्किंग (ब्रेन 3.0)’ का वैलिडिक्टरी सत्र के साथ सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यशाला के दौरान विश्वविद्यालय के भविष्य के अनुसंधान, शिक्षा, नवाचार तथा उद्योग-अकादमिक सहयोग को नई दिशा देने के लिए विस्तृत रोडमैप तैयार किया गया।
ब्रेन 3.0 के समापन सत्र के मुख्य अतिथि के रूप में कृषि महाविद्यालय के पूर्व अधिष्ठाता, गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर तथा असम कृषि विश्वविद्यालय के भूतपूर्व कुलपति डा. ए.एन. मुखोपाध्याय उपस्थित रहे। उन्होंने ब्रेन 3.0 के सफल एवं प्रभावी आयोजन के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन, आयोजन समिति तथा सभी सहभागी पूर्व छात्रों (एलुमनाई) को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी विश्वविद्यालय को एलुमनाई का इसी प्रकार सक्रिय सहयोग एवं मार्गदर्शन प्राप्त होता रहेगा, जिससे विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, अनुसंधान एवं नवाचार गतिविधियों को और अधिक सुदृढ़ता मिलेगी। डा. मुखोपाध्याय ने विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शिवेन्द्र कुमार कश्यप के नेतृत्व की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनके कुशल नेतृत्व एवं दूरदर्शी सोच के मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार एवं कृषि विकास के क्षेत्र में नई उपलब्धियाँ प्राप्त करेगा तथा निरंतर उत्तरोत्तर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहेगा।
दो-दिवसीय मंथन के दौरान विभिन्न विषयगत समूहों ने अपनी कार्ययोजनाएं प्रस्तुत करते हुए विष्वविद्यालय को राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर कृषि अनुसंधान, नवाचार एवं तकनीकी विकास का अग्रणी संस्थान बनाने के लिए अनेक व्यावहारिक एवं भविष्य उन्मुख सुझाव दिए। विशेषज्ञों ने कृषि में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), प्रिसिजन फार्मिंग, सेंसर आधारित सिंचाई प्रणाली, डिजिटल एग्रीकल्चर, हाइड्रोपोनिक्स, कार्बन फार्मिंग, कार्बन क्रेडिट, कार्बन उत्सर्जन मैपिंग, मृदा परीक्षण, मौसम आधारित निर्णय प्रणाली तथा फसल रोगों के पूर्वानुमान मॉडल विकसित करने पर विशेष बल दिया।
बैठक में उद्यानिकी क्षेत्र के विकास को लेकर भी महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए। उत्तराखंड में उच्च गुणवत्ता वाली नर्सरियों की स्थापना, बड़े पैमाने पर पौध उत्पादन, आधुनिक प्लांटिंग मैटेरियल उपलब्ध कराने तथा फल एवं सब्जी उत्पादन को तकनीकी सहयोग प्रदान करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। साथ ही इफको, एग्री मॉल तथा अन्य औद्योगिक एवं संस्थागत साझेदारों के सहयोग से नवाचार केन्द्र विकसित करने और कृषि तकनीकों के व्यवसायीकरण की दिशा में कार्य करने पर भी सहमति बनी। विशेषज्ञों ने मक्का साइलेज, नेपियर घास, ऊर्जा फसलों तथा कृषि अपशिष्ट से ऊर्जा (वेस्ट-टू-एनर्जी) उत्पादन जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान को बढ़ावा देने और किसानों की भागीदारी पर आधारित मॉडल विकसित करने का सुझाव दिया। एलुमनाई ने विश्वविद्यालय के अनुसंधान को उद्योगों की आवश्यकताओं से जोड़ने, कृषि आधारित स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने तथा तकनीकों के व्यावसायीकरण के लिए दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार करने पर बल दिया। कार्यशाला में विश्वविद्यालय में रिसर्च हेल्प डेस्क, इनोवेशन सेल, एआई एवं डेटा सेंटर, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर सिस्टम तथा उद्योग-अकादमिक सहभागिता को सुदृढ़ करने के लिए ठोस पहल करने की अनुशंसा की गई। साथ ही विद्यार्थियों को एलुमनाई नेटवर्क से जोड़ते हुए मेंटरशिप, इंटर्नशिप, स्टार्टअप सहायता तथा उद्यमिता विकास कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाने पर भी सहमति व्यक्त की गई। चर्चा के दौरान कार्बन क्रेडिट नीति, रिवॉल्विंग फंड, प्रोजेक्ट आधारित फंडिंग, एग्री-बिजनेस मॉडल, डिजिटल प्लेटफॉर्म, मौसम आधारित कृषि सलाह तथा किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकों के विकास पर भी विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।
समापन अवसर पर कुलपति प्रो. शिवेन्द्र कुमार कश्यप ने कहा कि ब्रेन 3.0 केवल विचार-विमर्श का मंच नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय के भावी विकास की दिशा तय करने वाला एक महत्वपूर्ण अभियान है। उन्होंने कहा कि एलुमनाई का अनुभव, उद्योग जगत की भागीदारी तथा विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक क्षमता मिलकर कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों एवं नवाचारों को किसानों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कार्यशाला से प्राप्त सुझाव विश्वविद्यालय की भावी नीतियों और अनुसंधान कार्यक्रमों को नई दिशा देंगे।
इस अवसर पर कुलसचिव डा. दीपा विनय ने ब्रेन 3.0 के सफल आयोजन में सहयोग प्रदान करने वाले सभी पूर्व छात्रों (एलुमनाई), प्रतिभागियों एवं सहयोगी संस्थाओं को बधाई दी। समापन सत्र के अंत में अधिष्ठाता, छात्र कल्याण डा. विपिन ध्यानी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए भारत सरकार के माननीय कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, उत्तराखण्ड के माननीय मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड सरकार के माननीय कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शिवेन्द्र कुमार कश्यप, सभी विशिष्ट अतिथियों, एलुमनाई, विभिन्न आयोजन समितियों के अध्यक्षों एवं सदस्यों तथा प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से ब्रेन 3.0 के सफल आयोजन में योगदान देने वाले सभी व्यक्तियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।

