सशक्त उत्तराखंड,पंतनगर। पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित ‘फैकल्टी इंटरेक्शन कार्यक्रम’ के अंतर्गत कुलपति प्रोफेसर शिवेन्द्र कुमार कश्यप ने विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय के शिक्षकों एवं वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की वास्तविक पहचान उसके शोध, नवाचार तथा समाजोपयोगी कार्यों से बनती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बहुविषयक शिक्षा एवं अनुसंधान की आवश्यकता निरंतर बढ़ रही है तथा विश्वविद्यालयों को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप स्वयं को तैयार करना होगा।
कुलपति प्रोफेसर कश्यप ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा प्रदान करने का केंद्र नहीं, बल्कि नवीन ज्ञान सृजन, वैज्ञानिक सोच एवं तकनीकी विकास का प्रमुख आधार भी है। उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान की विभिन्न विषयों यथा, अनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन, पादप रोग विज्ञान, औद्यानिकी, सब्जी विज्ञान एवं कीट नियंत्रण आदि सभी में जैव प्रौद्योगिकी के सहयोग से एक उच्च गुणवत्ता वाले शोध, कम्प्यूटेशनल साइंस तथा पर्यावरण विज्ञान जैसे क्षेत्रों को आपस में जोड़कर ही सतत विकास के लक्ष्यों को प्रभावी रूप से प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मूलभूत विज्ञान सभी शोध गतिविधियों की आधारशिला है और मजबूत वैज्ञानिक समझ के बिना कोई भी तकनीकी नवाचार सफल नहीं हो सकता। विश्वविद्यालयों को ऐसे शोध कार्यों को बढ़ावा देना चाहिए जिनसे समाज, उद्योग तथा किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिल सके। कुलपति ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शोध पत्र, पेटेंट, नवीन उत्पाद तथा तकनीकी विकास किसी भी संस्थान की प्रगति के महत्वपूर्ण संकेतक होते हैं। उन्होंने कहा कि आज विभिन्न उद्योग एवं संस्थाएं उन्हीं विश्वविद्यालयों से जुड़ना चाहती हैं जिनके पास मजबूत अनुसंधान क्षमता एवं प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध हों। उन्होंने विश्वविद्यालय में सामुदायिक सहभागिता, नेटवर्किंग तथा सहयोगात्मक परियोजनाओं के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों एवं वैज्ञानिकों को मिलकर कार्य करना चाहिए ताकि समाज की वास्तविक समस्याओं का समाधान खोजा जा सके तथा विश्वविद्यालय राष्ट्रीय विकास में अपनी प्रभावी भूमिका निभा सके।
कार्यक्रम के प्रारम्भ में कार्यवाहक अधिष्ठात्री, विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय डा. लक्ष्मी तिवारी ने महाविद्यालय की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन संकाय सचिव डा. एस.के. दूबे द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में संकाय सदस्यों द्वारा अनुसंधान कार्यों में आ रही कठिनाइयों से कुलपति को अवगत कराया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के सभी विभागाध्यक्ष एवं संकाय सदस्य उपस्थित थे।

