पशु चिकित्सा महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में कुलपति ने उत्कृष्टता, अनुसंधान और तकनीकी नवाचार पर दिया जोर

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सशक्त उत्तराखंड,पंतनगर। विश्वविद्यालय के पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय में आयोजित विशेष कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति ने पशु चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और संस्थागत संस्कृति को लेकर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में महाविद्यालय के अधिष्ठाता, वैज्ञानिकों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की उपस्थिति रही।

कुलपति प्रोफेसर शिवेन्द्र कुमार कश्यप ने कहा कि पशुचिकित्सा महाविद्यालय विश्वविद्यालय की ‘जीवंत इकाई’ के रूप में कार्य कर रहा है, जहां डेयरी, कुक्कुट पालन, चिकित्सीय सेवाओं और अनुसंधान गतिविधियों के माध्यम से प्रतिदिन समाज से सीधा जुड़ाव बना रहता है। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय की पहचान केवल शैक्षणिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तकनीक को प्रयोगशाला से किसानों और पशुपालकों तक पहुंचाने में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने बताया कि महाविद्यालय ने वर्षों से राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद एवं राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग रूपरेखा जैसी रैंकिंग में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए गुणवत्तापूर्ण शोध और सशक्त आंकड़ा प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कुलपति ने कहा कि संस्थान की वास्तविक शक्ति उसकी टीम भावना, कार्य संस्कृति और मजबूत शैक्षणिक वातावरण में निहित है। अपने संबोधन में कुलपति ने कहा कि किसी भी संस्थान की उत्कृष्टता केवल एक व्यक्ति के कारण नहीं होती, बल्कि अनेक वैज्ञानिकों, शिक्षकों और कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों से विकसित होती है। उन्होंने शिक्षकों और वैज्ञानिकों से नई तकनीकों को आगे बढ़ाने, शोध परियोजनाओं को मजबूती देने तथा बहु-संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने महाविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां भू्रण प्रत्यारोपण, जैव-प्रौद्योगिकी, रोग निगरानी तथा डेयरी क्षेत्र से जुड़ी कई उन्नत तकनीकों पर महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है। कुलपति ने अनुसंधान प्रयोगशालाओं को उत्कृष्टता का प्रमुख मानक बताते हुए कहा कि आधुनिक प्रयोगशालाएं और सक्षम शिक्षण संकाय किसी भी संस्थान की प्रगति की आधारशिला होती हैं। कुलपति ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय में ऐसा वातावरण विकसित किया जाना चाहिए जहां नवाचार, सहयोग और वैज्ञानिक सोच को निरंतर प्रोत्साहन मिले। उन्होंने कहा कि पशु चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि जीवों के प्रति संवेदनशीलता और सेवा का माध्यम है।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में अधिष्ठाता पशु चिकित्सा डा. डी. कुमार ने कुलपति का स्वागत किया और महाविद्यालय की प्रगति, वर्तमान में चल रही अनुसंधान परियोजनाओं तथा भविष्य की योजनाओं के विषय में कुलपति के समक्ष प्रस्तुति की। कार्यक्रम में महाविद्यालय के सभी विभागाध्यक्ष एवं संकाय सदस्य उपस्थित थे।


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