पंतनगर की छात्रा आईएयूए सर्वश्रेष्ठ पीएचडी थीसिस पुरस्कार से सम्मानित

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भोंपूराम खबरी,पंतनगर।  गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर के आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग की पीएचडी शोधार्थी डॉ. तुषाद्री सिंह को उनकी पीएचडी थीसिस “एडवांसिंग हीट स्ट्रेस टॉलरेंस वाया इंट्रोग्रेशन एंड जीन इंटरैक्शन स्टडीज इन ब्रेड व्हीट ( _Triticum aestivum_ L. em. Thell)” के लिए फसल विज्ञान श्रेणी में भारतीय कृषि विश्वविद्यालय संघ (IAUA) द्वारा “उत्कृष्ट पीएचडी शोध” पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह शोधकार्य आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष तथा प्रधान गेहूं एवं जौ प्रजनक डॉ. जे.पी. जायसवाल के निर्देशन में सम्पन्न हुआ।

यह शोधकार्य पारंपरिक पादप प्रजनन, जीन अंतःक्रिया अध्ययन तथा CRISPR/Cas9 आधारित जीनोम संपादन तकनीकों के समन्वय द्वारा ब्रेड व्हीट में तापीय तनाव सहनशीलता विकसित करने पर केंद्रित था। शोध के दौरान तापीय तनाव की परिस्थितियों में गेहूं की विभिन्न किस्मों में आकृति-शारीरिक, उत्पादन एवं उत्पादन संबंधी लक्षणों में महत्वपूर्ण आनुवंशिक विविधता पाई गई, जिसके आधार पर ऐसी उन्नत इंट्रोग्रेस्ड लाइनों का विकास किया गया जिनमें उच्च तापमान की परिस्थितियों में बेहतर अनुकूलन क्षमता एवं स्थिर उत्पादन क्षमता पाई गई।

 

इस अध्ययन की प्रमुख उपलब्धियों में तापीय तनाव सहनशीलता से संबंधित गेहूं जीनों के लिए SDN1-CRISPR/Cas9 जीनोम संपादन हेतु gRNA डिजाइन रणनीतियों का सफल अनुकूलन शामिल रहा। शोध में अत्यंत जटिल षट्गुणित (Hexaploid) गेहूं जीनोम से जुड़ी चुनौतियों का समाधान व्यापक इन-सिलिको विश्लेषण, लक्ष्य विशिष्टता मूल्यांकन, द्वितीयक संरचना परीक्षण एवं ऑफ-टार्गेट पूर्वानुमान के माध्यम से किया गया, जिससे सटीक जीनोम संपादन के लिए अत्यधिक प्रभावी एवं विशिष्ट गाइड आरएनए की पहचान संभव हुई। यह शोध भविष्य में बदलती जलवायु परिस्थितियों के बीच खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने एवं गेहूं उत्पादन को स्थायी बनाए रखने हेतु अगली पीढ़ी के गेहूं सुधार कार्यक्रमों को गति प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

प्रोफेसर जायसवाल ने बताया कि जीनोम संपादन आणविक प्रजनन की नवीनतम विधा है, जिसके लिए अत्याधुनिक प्रयोगशाला सुविधाओं की आवश्यकता होती है। डॉ. तुषाद्री का यह शोधकार्य भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल के सहयोग से सम्पन्न हुआ, जहां वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मुरमुथा एच.एम. ने शोधकार्य में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया। उन्होंने कहा कि यह सहयोगात्मक अनुसंधान का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसके परिणामों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर एस.के. कश्यप ने डॉ. तुषाद्री सिंह को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि उनकी मेहनत, समर्पण, शैक्षणिक उत्कृष्टता एवं शोध के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान का प्रतीक है। उनकी सफलता ने विश्वविद्यालय एवं उनसे जुड़े सभी लोगों को गौरवान्वित किया है तथा यह अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी।


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