सशक्त उत्तराखंड,नैनीताल /किच्छा – किच्छा नगर पालिका से अलग कर गठित की गई सिरौलीकलां नगर पालिका के चुनाव को लेकर नैनीताल हाई कोर्ट से बड़ी अपडेट सामने आई है। सूत्रों के अनुसार हाई कोर्ट के ताजा आदेश के बाद किच्छा और सिरौलीकलां नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष एवं सभासद पदों के लिए 22 सितंबर को मतदान तो होगा, लेकिन फिलहाल मतगणना और चुनाव परिणाम घोषित नहीं किए जाएंगे।
मामला नगर पालिका किच्छा से अलग कर सिरौलीकलां नगर पालिका बनाए जाने से जुड़ा हुआ है। इस संबंध में हाई कोर्ट में याचिका विचाराधीन है। न्यायालय के समक्ष मामले की सुनवाई के दौरान चुनाव प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट की गई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक चुनाव का मतदान निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कराने की अनुमति रहेगी, लेकिन मतगणना और परिणाम की घोषणा को फिलहाल रोका गया है।
बताया जा रहा है कि अब हाई कोर्ट में
विचाराधीन याचिका पर होने वाले निर्णय के बाद ही मतगणना की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है और सुनवाई डे-टू-डे आधार पर किए जाने की बात सामने आई है।
हाई कोर्ट के इस आदेश का सीधा असर किच्छा और सिरौलीकलां नगर पालिका चुनाव लड़ रहे सभी प्रत्याशियों और उनके समर्थकों पर पड़ा है। प्रत्याशियों ने लंबे समय से चुनाव प्रचार में मेहनत की है और अब मतदान के बाद तत्काल परिणाम की उम्मीद थी, लेकिन अदालत के आदेश के चलते मतदान के बाद मतपेटियों में बंद वोटों के नतीजे फिलहाल घोषित नहीं किए जा सकेंगे। इससे चुनाव मैदान में उतरे प्रत्याशियों में असमंजस और मायूसी का माहौल है। अब सभी की निगाहें हाई कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई और मामले के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं।
इधर, 22 सितंबर को होने वाले मतदान को लेकर प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। दोनों नगर पालिका क्षेत्रों में मतदान केंद्र बनाए जा चुके हैं और मतदान को शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की गई है।
राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से किच्छा और सिरौलीकलां नगर पालिका परिषद के अध्यक्षों तथा सदस्यों के निर्वाचन के लिए अधिसूचना पहले ही जारी की जा चुकी है।
अब 5 अक्टूबर पर टिकी नजर
किच्छा और सिरौलीकलां के मतदाता 22 सितंबर को अपने प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला मतपत्र प्रक्रिया के माध्यम से करेंगे, लेकिन उस फैसले का आधिकारिक परिणाम कब सामने आएगा, यह हाई कोर्ट में विचाराधीन मामले के निर्णय पर निर्भर करेगा।
