स्थानीय संसाधनों से रेजिन उत्पाद निर्माण प्रशिक्षण का आयोजन

Spread the love

सशक्त उत्तराखंड। गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर के सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय के संसाधन प्रबंधन एवं उपभोक्ता विज्ञान विभाग द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र, ज्योलिकोट, नैनीताल में “स्थानीय संसाधनों पर आधारित रेजिन उत्पाद निर्माण” विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम शोधार्थी श्रेया सांगवान के पीएच.डी. शोध कार्य के उद्देश्यों के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से स्वरोजगार एवं आजीविका के नए अवसरों से जोड़ना रहा।

कार्यक्रम का आयोजन शोधार्थी श्रेया सांगवान एवं उनकी पीएचडी गाइड डॉ. सीमा क्वात्रा के निर्देशन में किया गया। कार्यक्रम की सह-आयोजक कृषि विज्ञान केंद्र, ज्योलिकोट, नैनीताल की एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. सुधा जुकारिया रहीं। प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल संचालन हेतु कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. संजय चौधरी एवं संसाधन प्रबंधन एवं उपभोक्ता विज्ञान विभाग की प्रोफेसर डॉ. संग्या सिंह का सहयोग प्राप्त हुआ।
प्रशिक्षण में वीरा फाउंडेशन, देहरादून से आईं सुश्री निरंजन कौर एवं रुद्रपुर से आए श्री अनिल कुमार ने प्रतिभागियों को रेजिन कला एवं उत्पाद निर्माण की विस्तृत जानकारी दी। श्री अनिल कुमार ने फूलों को सुखाने की तकनीकों, रेजिन डिज़ाइनिंग, मिश्रण प्रक्रिया तथा उत्पाद निर्माण की संपूर्ण विधि का व्यावहारिक प्रदर्शन किया।
प्रशिक्षण में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी लगभग 100 महिलाओं ने सहभागिता की। महिलाओं ने प्रशिक्षण में सक्रिय रूप से प्रतिभाग करते हुए विभिन्न रेजिन उत्पाद स्वयं तैयार किए। प्रतिभागियों ने इसे स्वरोजगार एवं अतिरिक्त आय का प्रभावी माध्यम बताया।
प्रशिक्षण के दौरान कुरी एवं कालाबासा जैसी आक्रामक खरपतवार प्रजातियों के उपयोग पर भी चर्चा की गई। बताया गया कि इन स्थानीय रूप से उपलब्ध पौधों के सूखे फूलों, पत्तियों एवं अन्य प्राकृतिक तत्वों का उपयोग रेजिन उत्पादों में कर आकर्षक एवं पर्यावरण-अनुकूल सजावटी वस्तुएँ तैयार की जा सकती हैं। इससे एक ओर इन खरपतवारों के प्रबंधन में सहायता मिलेगी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण महिलाओं को कम लागत में नए उत्पाद विकसित करने का अवसर भी प्राप्त होगा।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने ऐसे प्रशिक्षणों को ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण एवं कौशल विकास के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।


Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *