देवभूमि का विकास केवल घोषणाओं तक सीमित: यशपाल आर्य

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सशक्त उत्तराखंड। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि देश के गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह राज्य सरकार के चार वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में देवभूमि में पधार रहे हैं। लोकतंत्र में यह स्वाभाविक है कि सरकारें अपने कार्यकाल की उपलब्धियों को जनता के सामने रखें और अपने कामकाज का उत्सव मनाएँ। लेकिन यह भी उतना ही आवश्यक है कि जब सरकार अपने चार वर्ष पूरे होने का जश्न मना रही हो, तब प्रदेश की वास्तविक स्थिति और जनता से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर भी गंभीरता से विचार किया जाए।

 

आर्य ने कहा कि आज उत्तराखंड कई महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना कर रहा है। राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों से लगातार हो रहा पलायन एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। अनेक गांव खाली होते जा रहे हैं और युवाओं को अपने घर-गांव छोड़कर रोजगार की तलाश में अन्य राज्यों की ओर जाना पड़ रहा है। ऐसे में प्रदेश की जनता यह जानना चाहती है कि पलायन रोकने के लिए सरकार ने चार वर्षों में क्या ठोस कदम उठाए और भविष्य की क्या योजना है।

 

उन्होंने कहा कि इसी प्रकार प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति भी समय-समय पर सवालों के घेरे में रही है। महिलाओं की सुरक्षा, बढ़ते अपराध और पुलिस व्यवस्था को मजबूत बनाने जैसे विषय जनता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। सरकार को इस अवसर पर यह बताना चाहिए कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए क्या सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं।

 

आर्य ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी प्रदेश में एक गंभीर विषय है। पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में आज भी विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी, अस्पतालों में संसाधनों का अभाव और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की सीमित उपलब्धता आम जनता के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है। चार वर्ष पूरे होने के अवसर पर यह अपेक्षा स्वाभाविक है कि सरकार स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के अपने प्रयासों और उपलब्धियों का स्पष्ट विवरण दे।

 

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इसी तरह सरकारी विद्यालयों की स्थिति भी चिंता का विषय है। कई स्थानों पर विद्यालयों में शिक्षकों की कमी, संसाधनों का अभाव और लगातार घटती छात्र संख्या शिक्षा व्यवस्था के सामने चुनौती बनकर खड़ी है। राज्य के भविष्य के लिए शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण आधार है, इसलिए इस क्षेत्र में किए गए कार्यों और आने वाली योजनाओं पर भी स्पष्टता जरूरी है।

 

उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवा वर्ग में बढ़ती बेरोजगारी भी एक बड़ा सवाल है। लाखों शिक्षित युवा रोजगार के अवसरों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। राज्य बनने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, लेकिन आज भी बड़ी संख्या में युवाओं को प्रदेश से बाहर जाना पड़ रहा है। ऐसे में सरकार को यह बताना चाहिए कि रोजगार सृजन के लिए कौन-कौन से ठोस कदम उठाए गए हैं।

 

नेता प्रतिपक्ष ने कहा उत्तराखंड एक आपदा संवेदनशील राज्य भी है। हर वर्ष प्राकृतिक आपदाएँ प्रदेश के सामने बड़ी चुनौती बनकर आती हैं। इसलिए आपदा प्रबंधन, पुनर्वास और भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना अत्यंत आवश्यक है। जनता जानना चाहती है कि इस दिशा में सरकार की उपलब्धियाँ और योजनाएँ क्या हैं। इसके साथ ही प्रदेश के किसानों की आर्थिक स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है। छोटे और सीमांत किसानों को खेती से पर्याप्त आय नहीं मिल पा रही है। कृषि, बागवानी और दुग्ध उत्पादन जैसे क्षेत्रों को मजबूत करने के लिए क्या कदम उठाए गए, यह भी जनता के सामने स्पष्ट होना चाहिए।

 

श्री आर्य ने कहा कि इसके अलावा राज्य में सड़क और बुनियादी ढांचे की स्थिति, विशेषकर दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क, बिजली और इंटरनेट कनेक्टिविटी की उपलब्धता भी एक महत्वपूर्ण विषय है। आज भी कई गांव ऐसे हैं जहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव लोगों के जीवन को कठिन बना देता है।

 

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पर्यटन उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख आधार है, लेकिन पर्यटन स्थलों पर अव्यवस्थित विकास, पर्यावरणीय दबाव और स्थानीय लोगों को पर्याप्त आर्थिक लाभ न मिल पाना भी गंभीर चिंता का विषय है। सरकार को यह बताना चाहिए कि पर्यटन को टिकाऊ और स्थानीय लोगों के लिए लाभकारी बनाने के लिए क्या ठोस योजनाएँ बनाई गई हैं।

 

उन्होंने कहा कि इसी प्रकार भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं और युवाओं के विश्वास के संकट का मुद्दा भी प्रदेश में चर्चा का विषय रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी सरकार की बड़ी जिम्मेदारी है।

 

आर्य ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और हिमालयी पारिस्थितिकी भी उत्तराखंड के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। अनियोजित विकास, जंगलों पर बढ़ता दबाव और जल स्रोतों के सूखने जैसी समस्याएँ भविष्य के लिए गंभीर चुनौती बन सकती हैं। ऐसे में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना अत्यंत आवश्यक है।

 

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि ऐसे में जब राज्य सरकार अपने चार वर्ष पूरे होने का जश्न मना रही है, तो यह अवसर केवल उत्सव का ही नहीं बल्कि आत्ममंथन और जवाबदेही का भी होना चाहिए। प्रदेश की जनता को उम्मीद है कि इस अवसर पर सरकार और देश के गृहमंत्री  अमित शाह  उत्तराखंड से जुड़े इन सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बात रखेंगे, सरकार की वास्तविक उपलब्धियों को सामने लाएंगे और भविष्य के लिए ठोस दिशा भी स्पष्ट करेंगे।

 

आर्य ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की जनता चाहती है कि प्रदेश का विकास केवल घोषणाओं तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर दिखाई दे ताकि राज्य के गांव, युवा, किसान और आम नागरिक वास्तव में विकास की मुख्यधारा से जुड़ सकें।


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