भोंपूराम खबरी,पंतनगर। गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के पशुचिकित्सा महाविद्यालय के पशु मादा रोग एवं प्रसूति विज्ञान विभाग तथा राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एन.डी.आर.आई.), करनाल के वैज्ञानिकों की संयुक्त टीम ने बद्री गाय के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है। टीम के प्रयासों से ओ.पी.यू.- आई.वी.एफ. तकनीक के माध्यम से तैयार उत्कृष्ट बद्री भ्रूण से एक साहीवाल गाय ने बद्री नस्ल की बछिया को जन्म दिया है।
इस अनुसंधान कार्य में पंतनगर विष्वविद्यालय के पशु मादा रोग एवं प्रसूति विज्ञान विभाग के डा. शिव प्रसाद, डा. सुनील कुमार एवं डा. मृदुला शर्मा, एन.डी.आर.आई., करनाल के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के डा. नरेश एल. सलोकर एवं डा. एम.के. सिंह तथा उत्तराखण्ड जैव प्रौद्योगिकी परिषद, हल्दी के निदेशक डा. संजय शर्मा की संयुक्त टीम का योगदान रहा। यह अनुसंधान कार्य उत्तराखण्ड जैव प्रौद्योगिकी परिषद, हल्दी द्वारा वित्तपोषित अनुसंधान परियोजना के अंतर्गत विगत तीन वर्षों से संचालित किया जा रहा है।
अनुसंधान के अंतर्गत ओ.पी.यू.-आई.वी.एफ. तकनीक का प्रयोग किया गया। सर्वप्रथम पंतनगर विश्वविद्यालय के शैक्षणिक डेयरी फार्म की बद्री गाय इकाई से उत्कृष्ट बद्री गायों का चयन किया गया। इन गायों से ओवम पिक-अप (ओ.पी.यू.) तकनीक के माध्यम से अण्डाणु एकत्र किए गए। प्राप्त अण्डाणुओं को प्रयोगशाला में 24 घंटे तक परिपक्व किया गया। इसके बाद परिपक्व अण्डाणुओं का उत्तराखण्ड लाइवस्टॉक डेवलपमेंट बोर्ड से प्राप्त बद्री गाय के उत्कृष्ट वीर्य से प्रयोगशाला में इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (आई.वी.एफ.) के माध्यम से निषेचन कराया गया। निषेचित अण्डाणुओं को अगले सात दिनों तक नियंत्रित प्रयोगशाला परिस्थितियों में विकसित कर बद्री भ्रूण तैयार किए गए।
अनुसंधान के अंतिम चरण में प्रयोगशाला में तैयार इन बद्री भ्रूणों का शैक्षणिक डेयरी फार्म की साहीवाल एवं संकर नस्ल की गायों के गर्भाशय में वैज्ञानिक विधि से प्रत्यारोपण किया गया। इन गायों में से एक साहीवाल गाय ने 11 सितम्बर 2026 को प्रातः 3ः10 बजे एक उत्कृष्ट गुणों वाली बद्री नस्ल की बछिया को जन्म दिया। इसके अतिरिक्त, संकर नस्ल की एक अन्य गाय भी आगामी 5-7 दिनों में बद्री नस्ल के बच्चे को जन्म देने की संभावित अवस्था में है।
परियोजना के अंतर्गत वर्तमान में उत्कृष्ट एवं अधिक दुग्ध उत्पादन वाली बद्री गायों की क्लोनिंग पर भी कार्य किया जा रहा है। टीम को अब तक तीन से चार चरणों में बद्री गाय के क्लोन भ्रूण तैयार करने में सफलता प्राप्त हो चुकी है। भविष्य में ओ.पी.यू.-आई.वी.एफ. एवं क्लोनिंग तकनीक से तैयार भ्रूणों को अधिक संख्या में साहीवाल, संकर एवं बद्री गायों में प्रत्यारोपित किए जाने की योजना है। इससे उत्कृष्ट आनुवंशिक गुणों वाली बद्री गायों की संख्या बढ़ाने तथा इस महत्वपूर्ण देशी नस्ल के संरक्षण एवं संवर्धन को गति मिलने की उम्मीद है।
इस महत्वपूर्ण अनुसंधान सफलता पर पंतनगर विष्वविद्यालय के कुलपति डा. शिवेन्द्र कुमार कश्यप ने शैक्षणिक डेयरी फार्म का भ्रमण कर पंतनगर विश्वविद्यालय एवं एन.डी.आर.आई., करनाल के वैज्ञानिकों की टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय भारत सरकार एवं उत्तराखण्ड सरकार की नीतियों के अनुरूप पशुओं एवं फसलों की महत्वपूर्ण नस्लों के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। बद्री गाय उत्तराखण्ड राज्य की एकमात्र पंजीकृत गाय की नस्ल होने के कारण इसके संरक्षण एवं संवर्धन का कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के अनुसंधान भविष्य में उत्तराखण्ड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं पशुपालकों की आय को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
पशुचिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता डा. डी. कुमार ने भी वैज्ञानिकों की टीम को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर बधाई दी।
अनुसंधान टीम के वैज्ञानिकों ने इस सफलता के लिए पंतनगर विश्वविद्यालय के कुलपति, नियंत्रक, निदेशक शोध, निदेशक, उत्तराखण्ड जैव प्रौद्योगिकी परिषद, हल्दी, पूर्व संयुक्त निदेशक, शैक्षणिक डेयरी फार्म, डा. एस.के. सिंह तथा वर्तमान संयुक्त निदेशक, शैक्षणिक डेयरी एवं कुक्कुट फार्म, डा. शिव कुमार के मार्गदर्शन एवं प्रशासनिक सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
