सशक्त उत्तराखंड,रुद्रपुर। विश्व रेबीज दिवस के अवसर पर पशुपालन विभाग उत्तराखंड, नगर निगम रुद्रपुर एवं CAWS (Companion Animal Welfare Society) के संयुक्त तत्वावधान में राजकीय पशु चिकित्सालय रुद्रपुर में रेबीज जागरूकता एवं निःशुल्क टीकाकरण अभियान आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान कुत्तों एवं बिल्लियों को एंटी-रेबीज वैक्सीन लगाई गई तथा लोगों को रेबीज से बचाव और पशु कल्याण संबंधी जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. पी.के. पाठक, डॉ. संदीप तलवार, डॉ. अभिषेक, एनिमल एक्टिविस्ट प्रथम बिष्ट (प्रकाश) सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
डॉ. पी.के. पाठक ने कहा कि रेबीज एक गंभीर लेकिन पूर्णतः रोकथाम योग्य बीमारी है। उन्होंने पालतू एवं सामुदायिक पशुओं को समय पर एंटी-रेबीज टीकाकरण कराने तथा जागरूक रहने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि नगर निगम क्षेत्र में एबीसी (Animal Birth Control) कार्यक्रम लगातार संचालित किया जा रहा है, जिससे आवारा कुत्तों की आबादी को मानवीय तरीके से नियंत्रित किया जा सके।
एनिमल एक्टिविस्ट प्रथम बिष्ट ने रेबीज से बचाव, प्राथमिक उपचार एवं जागरूकता के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि एबीसी कार्यक्रम के लिए वर्षों से विभिन्न संगठनों एवं पशु प्रेमियों द्वारा प्रयास किए गए, जिसके परिणामस्वरूप रुद्रपुर क्षेत्र में लगभग 7,000 कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है, जो कुल आबादी का लगभग 75 प्रतिशत माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब नगर पंचायतों एवं नगर पालिकाओं तक भी जागरूकता और नसबंदी कार्यक्रमों का विस्तार किया जाएगा।
कार्यक्रम में लोगों से एबीसी नियमों का पालन करने की अपील की गई। इसके अंतर्गत कुत्तों को पकड़ना, उनकी नसबंदी एवं एंटी-रेबीज टीकाकरण कराना तथा स्वस्थ होने के बाद उन्हें उसी स्थान पर छोड़ना कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है।
विशेषज्ञों ने बताया कि कुत्ते सामान्यतः बिना उकसावे के नहीं काटते। डॉग बाइट की अधिकांश घटनाएँ डर, दर्द, आत्मरक्षा, भोजन या बच्चों की सुरक्षा तथा छेड़छाड़ जैसी परिस्थितियों में होती हैं। इसलिए पशुओं के प्रति संवेदनशील व्यवहार और जागरूकता ही मानव-पशु संघर्ष को कम करने का सबसे प्रभावी उपाय है।
